बुजुर्गों का सम्मान करना हर समाज और परिवार का नैतिक कर्तव्य है। लेकिन हाल के दिनों में बुजुर्ग माता-पिता को प्रताड़ित करना एक गंभीर सामाजिक समस्या बन गया है। हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि बुजुर्गों को मानसिक उत्पीड़न, उपेक्षा और संपत्ति हड़पने की कोशिश संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है।
बुजुर्ग माता-पिता को प्रताड़ित करना क्यों है गंभीर अपराध?
संविधान का अनुच्छेद 21 हर नागरिक को गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार देता है। जब बेटे-बेटियां और बहुएं अपने बुजुर्ग माता-पिता को प्रताड़ित करते हैं, उपेक्षित करते हैं या जबरन संपत्ति हड़पने की कोशिश करते हैं, तो यह सीधे उनके मौलिक अधिकारों का हनन है।
हरियाणा मानवाधिकार आयोग का फैसला
हरियाणा मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा ने हाल ही में जारी आदेश में साफ कहा:
- बुजुर्ग माता-पिता को डर और उपेक्षा में जीवन जीने को मजबूर करना वरिष्ठ नागरिक अधिनियम, 2007 का ही नहीं बल्कि उनके मौलिक अधिकारों का भी उल्लंघन है।
- आयोग ने इस मामले में तुरंत कार्रवाई करते हुए बुजुर्ग दंपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश दिया।
- अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी।
मामला क्या था?
पंचकूला निवासी 82 वर्षीय अजय देव अग्रवाल और उनकी 72 वर्षीय पत्नी विजय अग्रवाल ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनका बेटा और बहू लगातार उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं।
- उन पर संपत्ति हड़पने का दबाव डाला गया।
- उन्हें घर से निकालने और वृद्धाश्रम भेजने की धमकी दी गई।
- यहां तक कि उन पर झूठा घरेलू हिंसा का केस भी दर्ज कराया गया।
बुजुर्ग दंपत्ति गंभीर बीमारियों और ऑपरेशन के बाद भी मजबूरन उपेक्षित जीवन जीने पर विवश थे।
बुजुर्ग माता-पिता को प्रताड़ित करना: कानूनी पहलू
- वरिष्ठ नागरिक अधिनियम, 2007 बुजुर्गों के अधिकारों की रक्षा करता है।
- संविधान का अनुच्छेद 21 गरिमापूर्ण जीवन का मौलिक अधिकार सुनिश्चित करता है।
- प्रताड़ना, उपेक्षा और संपत्ति हड़पने की कोशिश इन दोनों कानूनों का उल्लंघन है।
समाज को क्या करना चाहिए?
- बुजुर्ग माता-पिता को सम्मान और सुरक्षा देना हर संतान का कर्तव्य है।
- समाज को इस मुद्दे पर जागरूक होना होगा कि यह अपराध है।
- सरकार और प्रशासन को ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए।
निष्कर्ष
बुजुर्ग माता-पिता को प्रताड़ित करना केवल एक पारिवारिक समस्या नहीं है, बल्कि यह समाज और कानून के खिलाफ गंभीर अपराध है। हरियाणा मानवाधिकार आयोग का यह फैसला आने वाली पीढ़ियों के लिए एक चेतावनी है कि बुजुर्गों का सम्मान और देखभाल करना न सिर्फ नैतिक, बल्कि कानूनी जिम्मेदारी भी है।
